मालदीव में अदालती तख्त-पलट – डॉ. वेदप्रताप वैदिक

thedmnews.in मालदीव में आजकल जबर्दस्त उथल-पुथल मची हुई है। उसके राष्ट्रपति अब्दुल्ला यामीन की कुर्सी हिल रही है। जिस न्यायालय को वे अपने हाथ की कठपुतली समझ रहे थे, उसी ने उनके सिखकने का इंतजाम कर दिया है। मालदीव के सर्वोच्च न्यायालय ने फैसला दिया है कि जिन 12 सांसदों को सत्तारुढ़ दल से इस्तीफा देने के कारण यामीन सरकार ने अपदस्थ कर दिया था, उन्हें फिर से बहाल कर दिया गया है। उनके बहाल हो जाने से यामीन की सरकार अल्पमत में चली जाएगी। उसके लिए कोई भी कानून बनाना मुश्किल हो जाएगा। इसके अलावा राष्ट्रपति यामीन के खिलाफ महाभियोग भी सफल हो सकता है। अदालत ने नौ नेताओं की गिरफ्तारी को भी रद्द कर दिया है। इनमें मालदीव के पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद नशीद और एक उपराष्ट्रपति भी हैं। नशीद पर आतंकवादी होने का झूठा आरोप लगाया था। अदालत के इन दोनों फैसलों को आए तीन दिन हो रहे हैं लेकिन यामीन ने अभी तक इन्हें लागू नहीं किया है। वे अगले साल होनेवाले चुनाव अभी ही करवाने की धमकी दे रहे हैं। इस फैसले से यामीन इतने ज्यादा घबरा गए हैं कि उन्होंने दो दिन में मालदीव के दो पुलिस मुखियाओं को बदल दिया है।

यामीन से संयुक्तराष्ट्र संघ, अमेरिका, भारत और श्रीलंका ने संविधान का पालन करने की अपील की है। यामीन की दाल पतली होने का सबसे ज्यादा धक्का चीन को लगेगा, क्योंकि यामीन ने मालदीव को लगभग चीन की गोद में ही बिठा दिया है। उसने चीन के साथ मुक्त व्यापार समझौता किया, उसे एक पूरा द्वीप सामरिक उद्देश्यों के लिए दे दिया और उसने मालदीव के सभी भारतप्रेमियों को सताने में भी कोई कमी नहीं रखी है। उन्होंने भारतीय राजदूत से मिलने-जुलने पर रोक-टोक लगा दी थी। वैसे मालदीव के विदेश मंत्री अभी कुछ दिन पहले भारत इसीलिए आए थे कि भारत की नाराजगी को वे दूर कर सकें लेकिन अदालत के फैसले ने मालदीव की शतरंज के पासों को पलट दिया है। अब यामीन के विरुद्ध जनाक्रोश भड़के बिना नहीं रहेगा। देखा जाए तो मालदीव में हुए इस घटना-क्रम को न्यायिक-तख्तापलट ही कहा जाएगा। यह भारतीय विदेश नीति की दृष्टि से अकस्मात ही एक शुभ घटना हो गई है। मालदीवी लोकतंत्र की रक्षा के लिए भारत को खुलकर सामने आना चाहिए।